मिज़ाज में थोड़ी सख़्ती भी ज़रूरी है “जअसर शायद बेअसर हो गया है,
वो भी हमसे बेखबर हो गया है.!!
हमारे दिल पे क्या बीती वो क्या जाने,
उसके बगैर जीना अब दुश्वार हो गया है।।
हर चीज़ "हद" में अच्छी लगती हैं.... मगर तुम हो के "बे-हद" अच्छे लगते हो...! किशन लाल डांगी भमावत थूर, उदयपुर , मेवाड़ मो. 0917891529862