सोमवार, 6 जुलाई 2026

मिज़ाज में थोड़ी सख़्ती भी ज़रूरी है “जअसर शायद बेअसर हो गया है,
वो भी हमसे बेखबर हो गया है.!!

हमारे दिल पे क्या बीती वो क्या जाने,
उसके बगैर जीना अब दुश्वार हो गया है।।
मिज़ाज में थोड़ी सख़्ती भी ज़रूरी है “जनाब”
लोग पी जाते, अगर समुंद्र खारा ना होता ।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

कभी कभी थक जाती है भावनाऐं,,,बेपरवाह लोगो पर न्यौछावर होकर🙂

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, . . . हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.🌹

बुधवार, 21 जनवरी 2026

मुझे जवाब नही आते, उन्हें सवाल नहीं आते, ..... 
खामोश गुफ्तगू का, मज़ा ही कुछ और है...

मंगलवार, 13 जनवरी 2026

दवा दर्द की ढूंढने थे निकले,
वजह खुद ही थे ये मालूम न था।
तबाही के मंजर में भी हंसते हैं 
सोचो इश्क ने किस कदर तबा किया है हमें।