मंगलवार, 24 नवंबर 2015

हुस्न का क्या काम है सच्ची मोहब्बत में यारो,
जब आँख मजनू हो तो लैला हसीन ही लगती है।
यादें भी क्या क्या करा देती हैं,
कोई शायर हो गया, कोई खामोश।
दोस्ती कभी ख़ास लोगों से नहीं होती, जिनसे हो जाती है वही लोग ज़िन्दगी में ख़ास बन जाते है
वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

आएंगे हम याद तुम्हे एक बार फिर से..जब तेरे अपने फ़ैसले तुझे सताने लगेंगे

शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

अब मुहब्बत
किसको कहते है
मालूम नहीं !
हमने तो एक ही
शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी!!
अजीब था उनका अलविदा कहना, सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं, बर्बाद हुवे उनकी मोहब्बत में, की लुटा कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीँ
जब मिलो किसी से तो ज़रा दुर का रिश्ता रखना,
बहुत तड़पाते हैं अक्सर सीने से लगाने वाले लोग.........
लिखी कुछ शायरी ऐसी तेरे नाम से....
कि...
जिसने तुम्हे देखा भी नही,
उसने भी तेरी तारीफ कर दी..
खफा नहीं हूँ तुझसे " ए-जिंदगी" बस जरा
.
.
दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से..
आप को पा कर अब खोना नहीं चाहते,
इतना खुश हो के अब रोना नहीं चाहते,
ये आलम है हमारा आप की जुदाई में,
आँखो में निंद है और सोना नहीं चाहते
आँसू निकल पड़े खवाब मैं उसे दूर जाता देख कर,...
आँख खुली तो एहसास हुवा इश्क सोते हुए
भी रुलाता है...!!