गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

बहुत देता है तू उसकी गवाहियाँ और उसकी सफाईयाँ,
समझ नहीं आता तू मेरा दिल है या उसका वकील. .!!

रविवार, 6 दिसंबर 2015

वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।
कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी,
हाथ कटने के डर से किसी ने हमे समेटा भी नहीं ..!!