बुधवार, 30 सितंबर 2020

तुम्हारे साथ ही दिखी थी मुझे..
       फिर कभी ज़िंदगी नहीं देखी.. 
मिलकर बिछड़ गए हैं ऐसे,

झोंका हवा का निकल जाता है जैसे।।
सुकून सिर्फ इस बात का है,

वह नहीं उसकी यादें तो साथ है।।
मरम्मते करके रोज़ थक जाता हूं,

रोज़ मेरे अंदर नया नुक़्स निकल आता है।।
लिख कर रखा है तुम्हें मैंने किताबों जैसा,

तुम मेरे बाद भी दुनियां में पढ़े जाओगे।।

यहां उलझी पड़ी है ज़िन्दगी...वहां जुल्फें संवारी जा रही है...!!

नजाकत से चेहरे परहसीं कयामत लगती है।।

प्यार मोहब्बत आशिकी.ये बस अल्फाज थे.
मगर.. जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले
तुम चैन से सो जाओ,

दर्द को मैं संभाल लूंगा।
नजाकत से चेहरे पर

हसीं कयामत लगती है।।

सर से पांव तक थरथरा जाता हूं,तेरी यादों से मैं बहक जाता हूं।।

किसे सुनाये अपने दर्द,

आजकल सबके कान में इयरफोन रहते हैं..।।
लफ्ज भी उनकी बगावत नही करते...

जिनकी सिफारिशें दिल करता है...!!
उसको रुख़्सत तो किया था, मुझे मालूम ना था,

सारा घर ले गया, घर छोड़ के जाने वाला।।
हम तो बेखबर हो गए है उनके लिए...

क्यूं की वो हमसे ज्यादा किसी ओर की खबर रखते है...!!
तुम्हे याद करने की कीमत गर एक पैसा है तो...!!

सुनो न... अब अरबों के कर्जदार हो तुम...!!!
तुम्हें बस लाख तक आती है गिनती...

करोड़ों खामियां हैं मुझ में...!!

मंगलवार, 29 सितंबर 2020

इश्क करके मालूम हुआ हमें,

जान हथेली पर लेकर चलना पड़ता है।।
वो इश्क ही क्या ...!!

जो मुकम्मल ही छोड़ दे...!!
हम हर चेहरा भूल जाते हैं...!!

 जब तुम नज़र आ जाते हो...!!!

कैसे असर करेगी दवा हकीमों की,जब सारी तकलीफों का इलाज सिर्फ तुम हो।।

किसी ने पूछा हश्र-ए-मोहब्बत

हमने कहा.. ज़िंदा शरीर में मुर्दा मोहब्बत।।

ये शायरियां गवाह हैं,कि दिल लगाने वाले तबाह हैं...!!

मेरी ये सादगी ही अंधेरों में रखती है मुझे...

मैं ज़रा सा बिगड़ जाऊँ तो मशहूर हो जाऊँ...!!
उधार ही दे दो हमें,

मांग रहे हैं मोहब्बत आपसे।।

एक एक करके सब टँग लिये,वाह रे इश्क तेरे क्या कहने।।

सुना है अब किसी के जुल्फों में उलझ कर रह गया,

वो जो कभी मोहल्ले का सबसे सुलझा हुआ लड़का हुआ करता था।

प्रेम वो है जो जीवन में रंग भर दें।प्रेम वो है जो हर अल्फ़ाज़ को चंदन कर दें।प्रेम वो है जो जिस्म को रूह कर दें।प्रेम वो है जो तेरी यादों कोआखों का नीर कर दें।

किसी की मुहब्बत का अकेला वारिस होना...बड़े नसीब की बात है...!!❤️

सोमवार, 28 सितंबर 2020

खुदा करे सलामत रहे दोनो हमेशा

    एक तुम और दुसरा मुस्कुराना तुम्हारा

"लफ्जों" को बरतने का सलीका जरुरी है.... "गुफ़्तगू" में, गुलाब अगर कायदे से ना पेश हो तो कांटे चुभ जाते हैं।।

दर्द तो मिलना वाजिब था,

मोहब्बत जो गुलाब से की थी।।
सुनो न...

तुम ख्याल रखना अपना ...!!

मेरे पास आज भी कोई तुम सा नही...!!!
कुछ खास नहीं...
इन हाथों की लकीरों में !

मगर तुम हो तो...
एक लकीर ही काफी है !!
जिंदगी की सफर में तुम मिले कुछ इस तरह...

तपते रेगिस्तान में पानी की बूँद जिस तरह...।।
लिखे जो लफ्ज़ तुझे,
    वो तेरी तस्वीर के सामने।

हजारों दर्द सीने के,
    आखिर हमें रुला गए।।
कभी कभी ये ख्याल आता है,

इश्क पूरी जिंदगी क्यों रुलाता है।।
दर्द लिखता हूँ तो सकून मिलता है मुझे,

वरना अल्फाज चीर डालते है मुझे।।

बेइंतहा दर्द के बाद मालूम हुआ,हद से ज्यादा नजदीकी रुलाती है।।

सारे गमों को दिल से निकाल आया,जब सुना कि मेरा महबूब आया।।दिल बाग बाग हो गया था,लेकिन वो हमसे किनारा कर गया।।

शनिवार, 26 सितंबर 2020

राहत और चाहत में______बस फर्क है इतना..राहत बस तुमसे है__और चाहत सिर्फ तुम्हारी...!!💞

_कभी मुझसे भी तुम..__मुझ जैसा इश्क़ करो न...!!_😍

मे उसे अपना समझकर उसके सामने रो बैठा...आज पता चला उसे... मेरे आंसू तमाशा लगे...!!😔😔

यूँ तो काफ़ी मिर्च-मसाले हैं इस ज़िन्दगी में, तुम बिना ज़ायका फिर भी फ़ीका सा लगता है...

उम्र भी हार जाती है साहब,,,

जहां पर मोहब्बत रूहानी होती है...??

शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

इस तरह से देखो तुम सादगी बिखर जाए...आज मेरी आँखों से बेख़ुदी बिखर जाए...!!

दर्द तो सब के दिलों में है मगर...कोई लिख रहा है तो कोई पढ़ रहा है...!!

जाते जाते ही सही ये मलाल रह गया🙂
       क्या उसे भी मोहब्बत थी❣
            ये सवाल रह गया🤔
दिल बहला कर अपना,

 जाने क्यों धोखा दे जाते हैं लोग।।

सुना है के तुम रातों को देर तक जागते होयादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो..

मेरा प्यार राफेल डील सा था 
कभी उसको कीमत का अंदाजा ही नही हुआ 😢😢😢
जिसके नाम पर तुमने पूरी ज़िंदगी लिख दी है उसके ज़िंदगी में तुम्हारे नाम का ज़िक्र भी नहीं है

सिख लिये मैने भी इबादत के सारे सलीके...जाना तू एक बार मेरा खुदा बन के तो देख...

मोहब्बत लिबास नहीं... जो रोज़ बदला जाए...मोहब्बत तो कफ़न है... पहन कर उतारा नहीं जाता...!!

हर वो शायरी जिसमें तुझे अपना महबूब लिखा....जमाने ने पढ़ा और कहा, वाह क्या ख़ूब लिखा....

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

इश्क़ के चर्चे भले ही सारी दुनिया में होते
होंगे ...
पर दिल तो ख़ामोशी से ही टूटते हैं .
किस हक से मांगू अपने हिस्से का वक्त ......??आपसे क्योंकि ना आप मेरे हो और ना वक्त मेरा है....?😥
मुझे पढ़कर भी जो तुम जवाब नहीं देते हो न याद करोगे जब हम तेरे लिए लिखना छोड़ देंगे 😐

कोई हलचल है न आहट न सदा है कोई...दिल की दहलीज़ पे चुप-चाप खड़ा है कोई...!!

सुनो न...ख्वाब में ही उनसे हुए है रूबरू...!!वर्ना चाँद कहा किसी के हाँथ आता है...!!!

इश्क़ तो उन्हें किसी और से था..

बस हमारा शिद्दत से चाहना उन्हें भा गया!!

कुछ शिकायत बनी रहे तो बेहतर है...चाशनी में डूबे रिश्ते वफादार नही होते...!!

बुधवार, 23 सितंबर 2020

रातों का जागना सुबह का रोना,दिन भर यही लगा रहता है मेरा।।

आप आइना हो ,आइना बने रहो,
फिक्र वो करें जिनकी शक्लें खराब हैं.!
कितनी ख़ामोश मोहब्बत की है उनसे...
रोज जिक्र करते है उनका नाम लिए बगैर...💟
कयामत तो तब हुई ...!!

जब उसने फिर से झुमके पहने...!!

जब तुम सर झुकाकर पलकें छुपाते हैं,तेरे कान के झुमके मुझे क्यों चिढ़ाते है।।

सांसो पर कब्जा है तेरा,

जाने क्या रिश्ता है मेरा तेरा।।
दिन तो अब गुजर गया,

रात भी तेरे बिन गुजर जाएगी।।
सांसो पर कब्जा है तेरा,

जाने क्या रिश्ता है मेरा तेरा।।

दर्द की शाम हो या सुख का सवेरा हो सब कुछ क़बूल है अगर साथ तेरा हो...

ये रिमझिम बारिश... ये आवारगी का मौसम...

हमारे बस में होता... तो तेरे पास चले आते...!!
मुकम्मल इश्क़ की तलबगार नहीं है आंखे...

थोड़ा  थोड़ा ही सही... रोज तेरे दीदार की चाहत है...!!
चेहरे की क्या हिमाकत,

उनके तो झुमके भी दिल चीरते हैं।।

जाने क्या मन में सोचकर,बेवजह इल्जाम लगा देते हैं लोग।।

ज़रा गौर से पढ़ा कीजिए... 

हमारे अल्फ़ाजों को...

क्योंकि किसी के लिए हमने... 

सच में ज़िन्दगी तबाह की है अपनी...!!

मंगलवार, 22 सितंबर 2020

लोग हर बार यही पूछते हैं तुमने उसमें क्या देखा ,मैं हर बार यही कहता हूँ , बेवजह होती है मोहब्बत।

"थोड़ा मै,थोड़ी तुम और थोड़ी सी मोहब्बत" 💗 "बस इतना काफी है"
जीने के लिए
बात तो गुफ्तगू से थी,

देख तो तुझे तेरी तस्वीर से लेते हैं।।

अपना झुमका उतार फेंको ना,मुझे कान में कुछ कहना है ।।

जाते वक्त उसने खुश रहने को कहा था,

अब उसे हमदर्दी कहूं या कहूं नफरत।।
आज जिस हालात में हम हैं,

उसका श्रेय तुमको जाता है।।
लड़खड़ा जाती है कलम भी मेरी,

सब चीख सुनता हूं मैं अपने दिल की।।
सुना है आईना रोते हुए को हंसाता है,

हमें तो आईना खूब रुलाता है।।
सिर्फ शब्दों की तब्दील ही तो है...

वरना कहनी बात तो अब भी वही है...!!
व्यस्त हूँ मैं आज-कल खुद को तराशने में...!!

अब टूटूँ या निखरूँ लेकिन वादा है कहानी यक़ीनन लाजवाब बनेगी...!!

सोमवार, 21 सितंबर 2020

अक़्सर मोहब्बत दर्द ही देती है...बस शर्त इतनी है कि वो सच्ची हो...!!

एक ख्वाब सी होकर रह गई है... रस्म ए मोहब्बत...एक वहम सा है अब कि... मेरे साथ तुम भी थे...!!

कौन कहता है नफ़रतों मैं दर्द होता है...कुछ मोहब्बत बड़ी कमाल की होती है...!!

होंगे वो और कोई जिन्हें कदर नही किसी के प्यार की,,मे जिसे चाहता हु दिल ओ जान से चाहता हु ....

अलविदा कहते हुए जब हमने कुछ निशानी मांगी...वो मुस्करा के बोली जुदाई काफी नहीं है क्या...!!

इन्हें  बताओ  कि  लहरें  जुदा नहीं होती...

ये कौन लोग हैं जो पानी पे वार करते हैं...!!
कभी कभी मेरे मन में ख्याल आता है,

दिल के पास रहने वाला ही क्यों जुदा होता है।।

रविवार, 20 सितंबर 2020

मिलना बिछड़ना तो दस्तूर है जिंदगी का
साथ तो बस अहसास रहता है

कुछ इस तरह मिलना हमसे कि बात रह जाये...बिछड़ भी जायें तो हाथों में दोस्ती का हाथ रह जाये...!! ❤️

बहुत थके थके से लगते हो,रोका किसने हैं,गले लग सकते हो

आज हम चुपचाप जो बैठे हैं,

असलियत में उन्हें रिहा कर बैठे हैं।।

टूट कर चाहना और फिर टूट जाना...बात छोटी है मगर जान निकल जाती है...!!

मेरे रोने पे मुझ को टोकिए मत?
.
.
कमाई है तो खर्च कर रहा हूँ..!

वो जुल्फ़े खुली रखती है।।मेरा दिल बाँधने के लिए।।

शनिवार, 19 सितंबर 2020

डाकिए के भेष में आया था वक़्त...

और इक ख़ाली यादों का लिफ़ाफ़ा दे गया...!!

मुकम्मल छोड़ दो मुझको या फिर मेरे ही हो जाओ...मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हें पाना... तुम्हें खोना...!!

शब्द केवल चुभते हैं !!खामोशियाँ,,,,,,मार देतीं हैं !!

ख्वाहिशें पूरी नहीं हुई तो क्या...

हमने अपना ईमान अपना खुदा नहीं बदला...!!

कर सितम जितने भी मगर…इस दिल में धड़कन तेरे नाम की होगी,अधूरी ख्वाहिश तो बहुत सी है मगर,आखिरी ख्वाहिश तेरे दीदार की होगी।

नाम से तो पूरी गलीबुलाती हैबस तुम इशारो से पुकारा करो ।

यूं ही खामोश नहीं हूं मैं,मैनें अपनी ख्वाहिशों को जलाया है!!

बुधवार, 16 सितंबर 2020

हम वो शायर है,

जो लफ्जों की रूह निकालते है।।
वासना खींचती है आदमी को,

प्रेम प्रतीक्षा करता है...!!
मैं इतना दर्द कैसे सहता हूं

इसी बात पर लोग शोध कर रहे हैं।।
कुछ रिश्ते इसलिए भी टूट जाते है..
क्योंकि एक तो बात करने के लिए
 😔
इंतजार कर रहा होता है, और दूसरे 
को परवाह ही नहीं होती..!!💔😔
पल भर की बाते और महीनों की दूरी,
आदत तुम्हारी भी तनख्वाह सी हो गई है।
ना किसी की आरज़ू ना किसी की फरियाद करेंगे...

जिनको होगी हमसे मोहब्बत... वो खुद हमे याद करेंगे...!!
ये और बात के तुम पर निसार कर दी...

अज़ीज़ अपनी जवानी किसको नहीं होती...!!
बात तो रिश्तों के तवज़्ज़ो की थी...

हम निभाते गए वो मिटाते गए...!!

जाने किस की दुआओ से जिंदा हूं...सौ शिकारी है... एक परिंदा हूं...!!

लाख बुराइयां सही मोहब्बत में...
...पर ऐसा कोई नहीं ____जिसे इसकी तलब न हो ...!!

न जाने क्या कशिश है... उनकी मदहोश आँखों में... नज़र अंदाज़ जितना करो... नज़र उन्हीं पे ही पड़ती है...!!

हिसाब भी रखा कीजिए आजकल...

लोग पूछते हैं:- "तुमने हमारे लिए किया ही क्या है..??"
गर मुक़म्मल हुई तो "लाज़वाब" गर अधूरी रही तो "बेहिसाब"...

कमबख्त मुहब्बत तुम्हीं से है... तुम्हीं से रहेगी...!!

मंगलवार, 15 सितंबर 2020

💞 करीब..आ..जरा..कि..जीना..मुशकिल..है..💞

💞 हमको .तुझसे..ही..नही..तेरी..हर..अदा.से.....

                  ..........मोहबबत..है..💞💞💞
छू जाते हो तुम मुझे हर..
रोज एक नया ख्वाब बनकर.. 💞

ये दुनिया तो खामखां कहती है कि तुम मेरे करीब नहीं..!!! 💞💞❣️

आ लिख दूँ कुछ तेरे बारे में,मुझे पता है कि...तू रोज़ ढूँढती है खुद को मेरे अल्फाज़ों में,,,,,,,