शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

अब मुहब्बत
किसको कहते है
मालूम नहीं !
हमने तो एक ही
शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी!!
अजीब था उनका अलविदा कहना, सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं, बर्बाद हुवे उनकी मोहब्बत में, की लुटा कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीँ
जब मिलो किसी से तो ज़रा दुर का रिश्ता रखना,
बहुत तड़पाते हैं अक्सर सीने से लगाने वाले लोग.........
लिखी कुछ शायरी ऐसी तेरे नाम से....
कि...
जिसने तुम्हे देखा भी नही,
उसने भी तेरी तारीफ कर दी..
खफा नहीं हूँ तुझसे " ए-जिंदगी" बस जरा
.
.
दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से..
आप को पा कर अब खोना नहीं चाहते,
इतना खुश हो के अब रोना नहीं चाहते,
ये आलम है हमारा आप की जुदाई में,
आँखो में निंद है और सोना नहीं चाहते
आँसू निकल पड़े खवाब मैं उसे दूर जाता देख कर,...
आँख खुली तो एहसास हुवा इश्क सोते हुए
भी रुलाता है...!!