रविवार, 6 दिसंबर 2015

वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।
कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी,
हाथ कटने के डर से किसी ने हमे समेटा भी नहीं ..!!

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

हुस्न का क्या काम है सच्ची मोहब्बत में यारो,
जब आँख मजनू हो तो लैला हसीन ही लगती है।
यादें भी क्या क्या करा देती हैं,
कोई शायर हो गया, कोई खामोश।
दोस्ती कभी ख़ास लोगों से नहीं होती, जिनसे हो जाती है वही लोग ज़िन्दगी में ख़ास बन जाते है
वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

आएंगे हम याद तुम्हे एक बार फिर से..जब तेरे अपने फ़ैसले तुझे सताने लगेंगे