शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

वो तो बारिश कि बूँदें देखकर खुश होते हैं,
उन्हें क्या मालूम कि हर गिरने वाला कतरा पानी नही होता।

शनिवार, 16 जनवरी 2016

हमारी कद्र उनको होगी तन्हाईयो में एक दिन, अभी तो बहुत लोग हैं उनके पास दिल्लगी करने को....!!

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का,
रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता ह

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ..
तेरा गया कुछ नहीँ और मेरा रहा कुछ नहीँ..��

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

बहुत देता है तू उसकी गवाहियाँ और उसकी सफाईयाँ,
समझ नहीं आता तू मेरा दिल है या उसका वकील. .!!

रविवार, 6 दिसंबर 2015

वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।
कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गयी है ज़िन्दगी,
हाथ कटने के डर से किसी ने हमे समेटा भी नहीं ..!!