रविवार, 1 दिसंबर 2019

मीठा सा होता है...सफ़र यह ज़िंदगी का... बस कड़वाहट तो...किसी से ज़्यादा उम्मीदें रखने से होती हैं...
ये सर्द मौसम, ये ठंडी हवाँये और तेरी महक, लगता हैं दिसंबर आ रहा हैं तुमको साथ लेकर !!!
थोड़ा सही, पर जिम्मेदार हूँ मैं जिम्मेदारी से बचा नहीं करता !! दूध का शौक़ीन हूँ, बहुत जिद्दी हूँ थोड़ा बुरा हूँ पर नशा नहीं करता !!
सुनो, तुम भी बस ऐसे लौट आओ, जैसे लौटता सावन पतझड़ के बाद !!
सुनो, तुम भी बस ऐसे लौट आओ, जैसे लौटता दिसम्बर नवंबर के बाद !!
कि आठो पहर मुझ को फुर्सत नही , कहीं खो गया मेरा इतवार अब .....
तुम लौट तो आओगे ,सिर्फ़ राख से खोजने इश्क़ दोबारा