रविवार, 24 दिसंबर 2023

जिस-जिस जगह रखे थे उसने कदम,हमने वो जमीं ही चूम ली......और वो मेरे घर आकर कहती थी,आपका लड़का मिट्टी बहुत खाता है......

बारिश में वो अक्सर छतरी घर भूल जाती थी...मैं आज भी बादलों से सच्ची दोस्ती निभाता हूँ....

हम लिखते रहते है... वो पढ़ते रहते है...यू ही हम दोनो... एक दूजे से मिलते रहते है...

क्लासरूम हो या कयामत,ये कैसे मुमकिन था की हमारे होते तेरी गैरहाजरी लग जाए...... मैं बीस सालों से तेरी गिरफ्त में हूं,की इतने वक्त में तो कोई आईजी बन जाए......

जमीं इंतज़ार में थी की बादल बरसेंगे...और... हवा बादलों को उड़ा ले गई.......

दिन लड़कपन खा जाता था और रातें उसकी याद में कट जाती थी......मिलती थी तो बात नहीं करती और फोन पर सर खा जाती थी........

उसके लहजे में मिठास ऐसी थी....कीबुखार भी हो तो बच्चे स्कूल आते थे......