रविवार, 27 सितंबर 2015

मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे हम कहीं किसी रोज,.
ठोकरें !! ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ !...
दिल मे उजले काग़ज पर हम कैसा गीत लिखें
बोलो तुम को गैर लिखें या अपना मीत लिखें
"हम क्या है वोतो सिर्फ हम ही जानते है... लोग तो सिर्फ हमारे बारे में अंदाजा लगा सकते है "...

शनिवार, 19 सितंबर 2015

इश्क में जिस ने भी बुरा हाल बना रखा है,
वही कहता है अजी इश्क में क्या रखा है.........
हम तो बिछड़े थे तुम को अपना एहसास दिलाने के लिए,
मगर तुमने तो हमारे बिना जीना ही सिख लिया......
बहुत, बहुत, बहुत रोयेगी उस दिन जीस दिन में याद आऊंगा के
था कोई पागल जो पागल था सिफॅ मेरे लिए
किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम...,
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चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।”