शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

जिससे भी दिल लगाओ इस दुनिया मे सोच समझ कर लगाना कयोकि ये दुनिया वाले बेरहम सबसे पहले दिल हि तोडते है...

तुजे पा कर भी क्या हांसिल कर लूँगा मैं,
जब कि तुजे देख-कर ही ख़ुद को लूटा देता हूं मैं..!!

उनके पास शिकायत लेकर गए थे उनके दिए हुए
दर्द की
अपने सारे दर्द भूल गए जब उनको खुश
देखा तो!........

अपने किस किस राज को बे पर्दा करुँ यारों
जिस उम्र मे अक्ल आती है,
____________उस उम्र मेँ हम मुहब्बत कर बैठे

रविवार, 27 सितंबर 2015

मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे हम कहीं किसी रोज,.
ठोकरें !! ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ !...
दिल मे उजले काग़ज पर हम कैसा गीत लिखें
बोलो तुम को गैर लिखें या अपना मीत लिखें
"हम क्या है वोतो सिर्फ हम ही जानते है... लोग तो सिर्फ हमारे बारे में अंदाजा लगा सकते है "...