बुधवार, 30 दिसंबर 2020

*छोड़ आया था मेज़ पर चाय*
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*ये जुदाई का इस्तिआरा था*
वो जलाती रही हमारे लबों को और हम उसे चूमते रहे...

कमबख्त ये कैसा इश्क़ 
जो हम चाय से कर बैठे.... 
❤️❤️
तुम्हारी याद में हम चाय बहुत पीते हैं...
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या तो दीदार कराओ या फिर चायपत्ती भिजवाओ...
कोई तबियत से चाय पिलाये तो

हम दिल देने को भी तैयार हैं।
तुम्हारी याद में हम चाय बहुत पीते हैं...
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या तो दीदार कराओ या फिर चायपत्ती भिजवाओ...