शनिवार, 30 नवंबर 2019

तू कहती नहीं मैं बताता नहीं, ये प्यार है या पहेली, कुछ समझ आता नहीं...
ज़िन्दगी में कुछ लोग हमारे लिये बहुत खास होते है, लेकिन हम उनको बताते नहीं...
दीवारों से कभी खुद से... बातें करोगे तुम 
हमसे बिछड़ के रात दिन, रोया करोगे तुम
खुदा करे कभी,शिकन तक ना आए तेरे माथे पर.. मेरी आँखे तुझे,हर दौर में हँसता देखें....
ऐतबार की सीढ़ी से कुछ ऐसा गिराया उसने.....!! 
 अब तमन्ना भी करें चढ़ने की तो भी पाँव लड़खड़ा जाते हैं......!!
एक दिन हम और आप महज एक याद बनकर रह जाएंगे...!! 
कोशिश कीजियेगा कि यादें अच्छी बनी रहें...
मेरी हर नज़र में बसे हो तुम.... मेरी हर कलम पर लिखे हो तुम...!!! तुम्हें सोच लुं तो शायरी मेरी ना लिख सकुं तो वो ख्याल हो तुम.
खुदा से रोज़ तुम्हे मांगता हूँ.... 
 मेरी चाहत इबादत हो गई....
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
सुनो आजमा रही हो किसको अपने आप को या हमको बता जरूर देना कौन खरा उतरा है तेरी कसौटी पे !!
मेरी शराफ़त देखो आज तक किसी से नहीं कहा प्यार के लिये, ना उनको आने पे ना छोड़ जाने पे
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद अब कोई अच्छा भी लगता है तो हम इजहार नहीं करते !
जीवन के अनमोल पल का विश्लेषण करते हुए एक ख्याल आया , जिससे हमें पहला इश्क़ होता है वो हमारा क्यूँ नही हो पाता ? और हम इतने लाचार हो जाते हैं कि उसे जाने भी दे देते है बड़े आसानी से , बिना किसी रोक टोक के और यूँ ही सब कुछ होने देते हैं और ईश्वर से उम्मीद लगाए रहते है वो लौट जाए :(
ज़िन्दगी में कुछ लोग हमारे लिये बहुत खास होते है, लेकिन हम उनको बताते नहीं...
खुदा करे कभी,शिकन तक ना आए तेरे माथे पर.. मेरी आँखे तुझे,हर दौर में हँसता देखें....

?

इतने भी कीमती न थे तुम, जितनी तुम्हारी कीमत चुकाई मैंने
इतना "दिल"से ना लगाया करो मेरी बातो को ... 
 कोई "बात" दिल में रह गई तो "हमे" भुला नहीं पाओगे
मुकम्मल ना सही इसे अधूरा ही रहने दो, इश्क है कोई मकसद तो नहीं...
संभल कर किया करो गैरों से हमारी बुराई
तुम जाकर जिनको जताते हो वो आकर हमें बताते है
हर पल तेरी राह भटकती हैं... बिगड़ैल हो गई यादें मेरी भी.!!
आ लिख दूँ पत्तों पे हम दोनों का नाम कोई पूछेगा तो कह देंगे,हवाओं ने साजिश की होगी
क्या अजीब सी ज़िद है हम दोनों की, तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की
तेरी बेरूखी ने छिन ली मुझसे शरारते मेरी और लोग समझते है बहुत समझ गया हूँ मै....
" उसने कहा " हद ' हाेती है, हद' में न रहने की ""!
" हमने कहा, " जब ' बेहद ' लगे प्यारा काेई, तो कैसे 'हद ' में रहे काेई,,
लोग कहते है कि वक्त हर ज़ख्म को भर देता है... पर किताबों पर धूल जमने से कहानी बदल नहीं जाती
लिखते रहेंगे कागजों में कैसे गुजर रही है जिंदगी पढ़ेंगे लोग तो मुस्कुरायेंगे या पाएंगे आंखों में नमी
मैं जिसे सोचकर लिखता रहता हूं.. क्या तुम भी पढ़कर मुझे सोचते हो.!!
कुछ लोग नही समझते मेरे जज्बातों को उन्हें अपने एहसासों का एहसास कैसे कराऊँ....
धुँधली हो गयी यादें फिर से एक झोंका हवा का बनकर आ जाओ 
एक नज़र देख कर उसने , सौ नुक्स निकाले मुझमें। फिर भी मैं ख़ुश हूँ कि मुझे गौर से देखा उसने।।
दिल से ज्यादा महफूज जगह और कहीं नही मगर,,, सबसे ज्यादा लोग लापता यही से होते है ...
अब ना करूँगा अपने दर्द को बया किसी के सामने, दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यूँ करना
नही मिला कोई आज तक तूम सा मूझे कोई.....पर बात ये सितम अलग है की मिले तूम भी नही....!!

शनिवार, 23 नवंबर 2019

मेरा लिखना और तेरा पढ़ना उफ्फ्फ...
😍
कितना पढ़ा- लिखा इश्क़ है अपना...
😂
कल तक जो मेरे लफ्जों में हूआ करते थे, आज वोह मेरी खामोशी में है.