सोमवार, 29 जून 2020

दिल के ज़ख्मों को उनसे छुपाना पड़ा;
पलक भीगी थी पर मुस्कुराना पड़ा;
कैसे होते हैं यह मोहब्बत के रिवाज़;
रूठना चाहते थे उनसे, पर उनको ही मनाना पड़ा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें