शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

एक चाह थी हम साथ हो, जो चाह ही रही !
इश्क में ज्यादातर ख्वाहिशें तबाह ही रही !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें