सोमवार, 24 नवंबर 2025

बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;
जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

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