सोमवार, 24 नवंबर 2025

उनसे शिकवे और शिकायत इतनी है कि नजरें मिलाने को मन नही करता,और मोहब्बत इतनी कि दूर जाने को दिल नही करता।

उनसे शिकवे और शिकायत इतनी है कि नजरें मिलाने को मन नही करता,
और मोहब्बत इतनी कि दूर जाने को दिल नही करता।

बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;
जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नही देता।

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नही देता।
वो हमारी एक खता पर हमसे कुछ इस कदर रूठ कर चल दिए,
जैसे सदियों से उन्हें किसी बहाने की तलाश थी।