सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

पायल पहन के निकली हो, मालूम भी है कुछ,

छन छन से इनकी, कितने मुसाफिर भटक गये!!

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

ना पढ़ मुझे पूरी किताब समझकर, 
हर पन्ने पर अलग शख्सियत है मेरी!!......🖤

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

सर्द रातों से ,शरद यादों तक सिलसिले सब तुम्ही से जुडे है।।

तुझसे अच्छे तो जख्म है मेरे...

 
उतनी ही तकलीफ देते है जितनी बर्दास्त कर सकूँ...!!
दिल में उतर कर देखो तुम,

कितना चाहते हैं तुझे हम।।

मुझको चाहते होंगे और भी बहुत लोग...मगर मुझे मोहब्बत सिर्फ अपनी मोहब्बत से है...!! 💞

पछताये बहुत उसके दरवाजे पर दस्तक देकर...

दर्द की इंतेहा हो गयी जब उसने पूछा कौन हो तुम...!!

तुम्हारे दूर ....रहने से हमें तकलीफ होती है,....आज इतना करीब आ जाओ .......की हम बहक जाये।।

कोई नही आता मलहम लगाने के लिए,

चुपके से रो लेते हैं और दिल हल्का हो जाता है....!
जिंदगी की एक ही ख्वाहिश थी,

अफसोस बिन तेरे वो भी अधूरी थी।।

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

नहीं है शिकवा हमें किसी की बेरुखी से…..

शायद हमें नहीं आता किसी के दिल में घर बनाना…
मंज़र अब पहले सा कहाँ रह गया...

उसकी आँखे अब मुझे ढ़ूढ़ती ही नही...!!

एक हद तक दर्द सहने के बाद इंसान खामोश हो जाता हैं,,,,फिर वो ना किसी से शिकायत करता है-----और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखता है💔😥

किसी की आदत हो जाना...मोहब्बत हो जाने से भी ज्यादा खतरनाक है...!!

उस सुनार पर नूर की बरसात हो... जिसने तुम्हारी नाज़ुक सी नाक की नथ बनायी...!!

एक मामूली सा ख़्याल हूँ...

कभी याद आए... तो मुस्कुरा देना...!!
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ
शक भी लाजमी  है इश्क में हजूर...
 
 
हक और मोहब्बत दोनों का पता देता है...!!
ख्वाहिशों की आदत भी कितनी बेतुकी हैं...

मुकम्मल होते ही फिर से बदल जाती है...!!
अब तो खुद से मिलने की इच्छा होती है...

लोगो से सुना है की बड़े दिलचस्प है हम...!!

कितना आसान था उस पहेली को समझ पाना एक तुम थे जो समझना ही नहीं चाहते

हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक...हम से पूछे कोई होती है मोहब्बत कैसी...!!

आज फिर दस्तक हुई है मेरे दरवाजे पर...

देखू तो मौत है या फिर से कोई मतलबी...!! 💔

क्या ख़ूब कहा किसी ने...जिस मुहब्बत का जवाब न आये उसे इश्क़ कहते हैं...!!

अक्सर पूछते हैं लोग तुझसे बिछड़ने की वजह...

मैं खुद की कमी बताकर तेरी इज़्ज़त बढ़ा देता हूँ...!!

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

वो रूठ कर बेवजह...हमें बे मौत मार गया...!!

मुझे रेत से क्या लेना देना...

जहाँ तू नहीं...

वो हर जगह रेगिस्तान है...!!

इतने करीब आ के सदा से गया कोई...मैं बुझ रहा था मुझको हवा दे गया कोई...!!

इतनी शिकायत लाते कहाँ से हो...

इश्क़ करते हो या हिसाब...??
इस जहान में कब किसी का दर्द अपनाते हैं लोग, रुख हवा का देखकर अक्सर बदल जाते हैं लोग.......
वो मुझसे बेहतर की तलाश मे निकली है...

अफ़सोस की वो अब तक लौटी ही नहीं...!!☝️❤️
एक मामूली सा ख़्याल हूँ...

कभी याद आए... तो मुस्कुरा देना...!!
क्यूँ हैं... कब तक हैं... किस की खातिर हैं...

बड़े संजीदा मसले है हम...!!

अब कहाँ तक भरूँगा... मैं अपने ज़ख़्म तुम्हारे दिलासों से...इतने ही खैरख़्वाह हो... तो मेरे साथ रोते क्यों नहीं...!!

जब भी तुम चाहो मुझे छोड़ कर जा सकते हो...तुम से पहले भी किसी को नहीं रोका मैं ने...!!❤️

पहले जैसा हो तो जाऊं मगर...

याद तो आए पहले कैसा था...!!
उसने ना जाने किस तरह से मोहब्बत बांटी...

मेरे हिस्से में फकत दिलासे आए......!!
"इश्क़" भी अजीब बीमारी है...

जिंदगी है हमारी और तलब तुम्हारी है...!! ❤️

सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

मेरी एक ख्वाहिश है कि मेरी 

उस ख्वाहिश की हर ख्वाहिश पूरी हो😘🙈
अब सुकून में हो क्या,

मेरे ना होकर।।।

तुम सोच भी नहीं सकते ,कि कितना सोचते हैं तुम्हे....!

घुट घुट कर जीते रहे... कोई फरियाद ना करे...

कहां से लाऊं वो दिल... जो तुझे याद ना करें...!!

मैने अंगारे छू कर भी बताया उस को।। कि ऐसे जलता है दिल तेरी बेरुखी से।।

रविवार, 11 अक्टूबर 2020

तकदीर को कुछ इस तरहा अपनाया है मेने,

जो नही था तकदीर मैं उसे भी बेपनाह चाहा है मैने।।
तुम इंतेज़ार को अपनी घड़ी में बांध देना......
कभी तो घड़ी की बैटरी ख़तम होगी
नींद आती नहीं याद जाती नहीं
 बिन तेरे अब जिया जाए ना 😔😔
हम हैं उनके दिल में, ले डूबी ये गलतफहमी हमको
ख़ुद को बेवफ़ा ठहराके,

हम कहानी से निकल गए..!!
दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो,

धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।।

खौफ यह नहीं है कि ईश्क हुआ है,कह़र तो यह है कि वो जान गई है।।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

रात के अंधेरे में,

क्या रखा है सुनाने में।।
सीने के ज़ख़्म पाँव के छाले कहाँ गए,

ऐ हुस्न तेरे चाहने वाले कहाँ गए।।
फासले जब महसूस होने लगे....😊🙄       

        ....तो बना भी लेने चाहिए...🙄😳
बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता,

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता।।
हर रोज तड़पा हूं उसके याद में💔💔💔मगर उसे फर्क नहीं पड़ा साहब 😥😥😥
आज जिऊं या मरूं 💔💔 उसे क्या फर्क पड़ेगा साहब 💔💔💔 
जो अपने थे कभी,

गैर बन बैठे हैं अभी।।।

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

वो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से...

वो क्या अफ़सोस करेगा मेरे ना होने से।।
कोई दुश्मनी नही ज़िन्दगी से मेरी..

 बस ज़िद्द है तेरे साथ जीना है..
मेरा किरदार बिना इश्क़ के जचेगा क्या,

 अगर खुद से उन्हें निकाल दू तो बचेगा क्या।।
यूँ तो हर रंग का मौसम मुझसे वाकिफ है मगर...

रात की तन्हाई मुझे कुछ अलग ही जानती है...!!
सात फेरों का नहीं,

आत्मा का गठबंधन हैं तुमसे।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

गलती बस मेरी इतनी ही होती है....

कि मैं खुद से ज्यादा सब को ज़रुरी समझ लेता हूँ...

उस सुनार पर नूर की बरसात हो... जिसने तुम्हारी नाज़ुक सी नाक की नथ बनायी...!!

धागा खत्म हो गया है... तुझें मन्नतो मे मांगकर...धड़कनें बांध कर आया हूं... अबकी बार तेरे नाम पर...!! 💞

सबूत गूनाहो के होते हैं, बेगुनाह मुहब्बत का क्या सबूत दूं।।

खुद को तोड़ कर भी देख लिया... पर तू ना निकला मुझ से...!!😢

तनहाई के लम्हें अब तेरी यादों का पता पूछते हैं...

तुझे भूलने की बात करुं तो ये तेरी खता पूछते हैं...!!

रिश्ता क्या है तुमसे पता नहीं!..पिछले जन्म के बैरी लगते हो..!

तुमसे एक दरख्वास्त है...

कहीं से मुझे ढूँढ़कर ला दो...!!

बुधवार, 7 अक्टूबर 2020

अफ़वाह थी🙈.. कि कोई तस्वीर छपी है उनकी💖💚
सुबह से ही हम सारे💝....अखबार लिये बैठे हैं..😂😅
सुकून की तलाश में निकले थे हम,

तो दर्द बोला.. औकात भूल गए क्या।

💕दिल्लगी हद से न गुज़रे... ये ख्याल रखियेगा...💕जान पे बन आती है मोहब्बत में... ये ख्याल रखियेगा...!!

किसी की जान पर बन आई थी.....

किसी को अब भी मजाक ही लग रहा था इश्क़.....❤️🙏🏻
जब जब पुकारा तुम्हे... तुम मसरूफ़ हो गये...

हुआ हर बार यही... मेरे साथ इत्तिफ़ाक़ से...!! 🍂🍂

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

हमने तो कुछ शेर कहे हैं बस उल्फत में

पैसे वाले ताजमहल बनवाते हैं..!!

_सब कुछ अधूरा लगता हैं तेरे बिना.. ,,,,,,__क्या तुम्हें भी ऐसा लगता हैं मेरे बिना,,,_

फ़लक तक साथ चलने का इरादा है मेरातुम बस जमीं पर साथ ना छोड़ना...।।

करीबी तकलीफ दे गई मोहब्बत में मेरी

खता उसकी ही थी या थी कोई मजबूरी।।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2020

दूर से चाहने वाले,

अपना हक क्यों जताते हैं।।
हंसाता है रुलाता है,

ये इश्क़ बहुत सताता है।।
हंसाता है रुलाता है,

ये इश्क़ बहुत सताता है।।

गोबर फेकने के बहाने मिलनें आया करती थी वो मोहब्बत के दुश्मनों ने एक दिन भैंस ही बेच दी 😭

इश्क में कदम भी लड़खड़ा जाते थे,इससे तो तन्हा ही बेहतर थे।।

इश्क में कदम भी लड़खड़ा जाते थे,

इससे तो तन्हा ही बेहतर थे।।
दो पल की मोहब्बत तमाम उम्र खामोश कर गया,

जाने वाला रातों का सुकून भी ले गया।
भीग जाती है मेरी आंखें,

जब आती है तेरी यादें।।

रविवार, 4 अक्टूबर 2020

किसी ने आना भी चाहा तो भगा दिया हमने,

बसाकर दिल में तुम्हे कर्फ्यू लगा दिया हमने ।।

हथेलियाँ तो मिल गई थी,लकीरें न मिल सकीं...।।

कोरोना से मरने से अच्छा है मैं तुझ पे मर जाऊं..।।

आज मालूम हुआ है हमें,

इश्क कितना रुलाता है हमें।।

मेरा लफ्ज़ भी तेरा ख्याल रखते हैं, तू दूर है हमसे पर याद तुझे हर बार करते हैं।।

खुशबू बिखेर देती हो हर जगह,नाम भी तेरा कुछ तुम जैसा है।।

खुशबू बिखेर देती हो हर जगह,नाम भी तेरा कुछ तुम जैसा है।।

क्यों सताते हो अपनी यादों से,

अश्क नहीं पिघलते मेरी आखों से।।
लत तुम्हारी लगी है और,
इल्ज़ाम फोन पर आता है,,,!!
वो कहते है कम बोलते हो सबसे,

हमने कहा बहुत कुछ कहना है उनसे।।
लत तुम्हारी लगी है और,
इल्ज़ाम फोन पर आता है,,,!!
हर पल तेरी यादों में जकड़े रहते है.....!!!

ना दिन का पता चलता है ना रात का...!!
_*जीने के लिए नहीं चाहा है तुम्हें,*_

_*तुम्हें चाहने के लिए जीते हैं अब हम...!!!*_ ❣️❣️
अश्क़ सीने में उतर जाए... तो... कोई खौफ़ नहीं...!!

...दिल जब आंखों में धड़कता है ...तो डर लगता है...!!
उनको भूला तो दूं मगर, 

फिर खुद को याद रखना मुश्किल है।

शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

उसके "गालों पर पडे" डिम्पलने कयामत कर दी ....देखो! इक छोटे से "भंवर में "दिल मेरा "डूब गया

जिस शाम उसे आना था, 

वो शाम कभी नही आयी...!!
गुरूर हमेशा हुस्न का नहीं होता.!

कभी कभी किरदार का भी होता है..!
मै आपको चाँद कह दू ये मुमकिन तो है,
मगर... लोग तुम्हे रात भर देखें ये मुझे गवारा नहीं…..!!!
बख्श देना इश्क़ मे हमारी गुस्ताखियां...

दिल ही काबू मे नही तो हम क्या करें..!!
पूरी हो ना हो अलग बात है,

ख्वाहिशें हर एक दिल में होती है।।

जान लेने का इरादा है क्या आपका,अक्स रूबरू क्यों नहीं होता आपका।।

पूछते हैं आज कल लोग हमसे,इतना दर्द सहते हो कबसे।।

यूं भला कब तक इम्तेहान लोगे तुम हम जान कहते हैं तुम्हें , तो क्या जान लोगे तुम ?

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

यूँ न समझ उम्र छीन लेगी खूबसूरती तेरी मखमल में सिलवटें भी बडी दिलकश लगती हैं

कोई कभी मुज से मेरी जैसी मोहब्बत करके तो देखे,,,,,

प्यार उम्मीद से बढ़कर ना हो तो सजा-ए-मौत दे देना....

हर हकीम ने तोबा कर ली मुझसे,कहा इश्क किया है कोई दवा असर नहीं इसपे।।

तेरी आँखों से गुफ्तगूं करके,मेरी आँखों ने बोलना सीखा।।

कोन है जो करे रफुगरी मेरी,इश्क़ खा गया जगह-जगह से मुझे।।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

मुसाफिरों से कहो, रात से शिकस्त न खाये मैं ला रहा हूँ अपने, लहू से चराग़ भर के।।

इश्क़ एक बहुत जहरीला जंगल है,

यहां सांप नहीं हमसफ़र डसा करते है।।
यह दुनिया एक लम्हे में तुम्हे बर्बाद कर देगी,,

 मोहब्बत मिल भी जाये तो उसे मशहूर मत करना..!!
छुप जाता हूं अपने लफ्जो के पीछे,

वह मुझे ढूंढती हैं नफरत के लिए।।
लोग कहते हैं कि कभी मुस्कुराया भी करो,

अब उन्हें क्या कहें

हंसाने वाले ही जिंदगी से दूर चला गया।।
अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा है,

        कि जो हमें खोएगा,वो यकीनन रोयेगा..!!
ज़हर देता है कोई कोई दवा देता है,

जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है।।
इस बेगानी दुनिया में तेरी उम्मीदों का सहारा लेकर,

हम तुम्हें फिर से चाहेंगे एक उम्र दुबारा लेकर..!!

कोई ताल्लुक पूछे तो बता देना,,दो जिस्मों में एक जान है हम...

आशिकी बेहद थी हमें उनसे,

और उन्हें नफरत थी हमसे।।
प्रार्थना भी की और इबादत भी की,

तन्हा रहने की कौन सी सजा मिली मुझे।।
जाने वाले खुश रहने का दिलासा दे जाते हैं,

समझ नहीं आता ये लोग छोड़कर ही क्यों जाते हैं।।