शनिवार, 27 जनवरी 2024

अपनी आदत के मुताबिक़ चल रहें हैंहम आज भी जल रहें हैंमेरी आँखों में है अब भी वो सूरत बसी हुईहम रोज ज़रा ज़रा खुद को छल रहें हैंचाहे तो देख लो छूकर मुझे तुम ज़ख्म कितने मेरी सांसों में पल रहें हैं..!!!

अपनी आदत के मुताबिक़ चल रहें हैं
हम आज भी  जल रहें हैं

मेरी आँखों में है अब भी वो सूरत बसी हुई
हम रोज ज़रा ज़रा खुद को छल रहें हैं

चाहे तो देख लो छूकर मुझे तुम 
ज़ख्म कितने मेरी सांसों में पल रहें हैं..!!!

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