शुक्रवार, 27 मार्च 2020

लोग समजते हे की में तुम्हारे हुस्न पे मरता हूँ , अगर तुम भी यही समजते हो तो सुनो ; जब हुस्न खोदो तब लौट आना!
मेरा दर खुला हे खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए

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