गुरुवार, 2 मई 2024

यूं पहरा ना दो लबो पे.. अश्क रोके नहीं रूकते इश्क के, अश्क रोकते ही क्यों है बह जाने दो इनको लग जाओ सीने से ना रोको खुद को..

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