हर चीज़ "हद" में अच्छी लगती हैं.... मगर तुम हो के "बे-हद" अच्छे लगते हो...! किशन लाल डांगी भमावत थूर, उदयपुर , मेवाड़ मो. 0917891529862
बुधवार, 29 मई 2024
यदि पुरुष स्त्री को अपनी बाहों में लेना चाहता है ,तो उसका तात्पर्य केवल वासना मात्र ही नहीं हो सकता है ,कई दफा इसका अर्थ होता है वह स्त्री को उसकी आत्मा तक स्पर्श करना चाहता है, उस स्त्री के मन को टटोलना चाहता है ,जो अथाह प्रेम को अपनेमन में कहीं दबा लेती है ,वह अपने सीने से लगाकर स्त्री की आंखों के आँसुओ को,प्रेम से सोख लेना चाहता है,उस स्त्री के सूखे वीरान पड़े जीवन को प्रेम की बारिशों में भिगो देना चाहता है ,यह वासना नही है उस पुरुष का अथाह समर्पण है,उस स्त्री के लिए जिसे वह हृदय से प्रेम करता है.💞💞💞
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