मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

इक दिन, क्यू ना... एक घूंट चाय, तिरी झूठी प्याली से पी के देखू इक दिन, क्यू ना... आशिकों की बेबसी पे, मैं भी तो हँस के देखू

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