मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

मेरे लफ्जों से न कर मेरे किरदार का फ़ैसला...
तेरा वजूद मिट जायेगा मेरी हकीकत ढूंढ़ते ढूंढ़ते...
डर लगता है तुम्हें याद करने से.... यूँ हर वक़्त याद करने से कहीं,खत्म ना हो जाएं यादें तेरी. ....
अब कम से क्या लेना ज़्यादा से क्या लेना बस साथ तुम्हारा हो दुनिया से क्या लेना

रविवार, 29 दिसंबर 2019

डर लगता है तुम्हें याद करने से.... यूँ हर वक़्त याद करने से कहीं,खत्म ना हो जाएं यादें तेरी. ....
इतना तो😍😍 किसी ने चाहा 😏😏 भी न होगा😘😘 जितना मैंने सिर्फ 👰👰सोचा है तुम्हें
रूठना नही हमे मनाना नही आता दुर नही जाना हमें बुलाना नही आता तुम हमें भुल जाओ तुम्हारी मर्जी मगर हम क्या करें हमे तो भुलाना भी नही आता...!!
बेशुमार सा लिखना था .
मैंने '' तुझ पर एतबार '' .....लिख दिया

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

इबादत सी कर ली है... हमने तुमसे इश्क़ कर के तुम्हें याद किये बिना.. ना दिन निकलता है ना शाम ढलती है 
जोर कहाँ चलता है फिर दिल पर एक बार जो मोहब्बत से मिल लिया

कहने को बहुत कुछ है पर आज ख़मोश ही रहूँगा 
वो कहती थी, बहुत पसंद है हंसी तुम्हारी बस फिर क्या, छीन कर ले गई!
सुनो, ये जो नैन घूमा "हूंह" करके मुँह ऐंठती हो न मेरा दिल तुम्हे बाहों मे समेटने को पागल हुआ जाता है..!
ज़िन्दगी तेरे सौदे में... बस ख्वाहिशें ही खर्च हुईं...!!
लिखने का मज़ा तब है, जब कोई पढ़ने का इंतज़ार कर रहा हो.......
यह सर्द दिसंबर भी जून सा लगता है कुछ यूं तेरी आगोस में सुकून सा लगता है 
एक दूसरे के 'जैसा' होना जरूरी नहीं होता एक दूसरे के 'लिये' होना जरूरी होता है
एक ख़्वाब ही था जिसने साथ ना छोड़ा,
हक़ीक़त तो बदलती रही हालातो के साथ..
आप पूछ लेना सुबह से... ना यकीन हो तो शाम से... एक दिल धड़कता है... सिर्फ आपके नाम से...!!
आपके इश्क़ को कुछ इस तरह से निभाते हैं हम... आप नहीं हो तकदीर में... जानते हैं , फिर भी आपको बेपनाह चाहते हैं हम...!!
देखा हज़ारों दफ़ा आपको फिर ये बेकरारी कैसी है.. संभाले संभलता ही नहीं यह दिल कुछ आप में बात ही ऐसी है...!!
तुम्हारी खुशियां की ठिकाने
बहुत होंगे
मगर हमारी बेचेनिया की वजह
तुम हो
इतना कुछ हो रहा है दुनिया में;
क्या तुम मेरे नहीं हो सकते।
काश हम उनके बूथ के मतदान अधिकारी होते

हाथ थाम लेते उनका .. स्याही लगाने के बहाने
कैसे कह दू महोब्बत नही है तुमसे... ....... 
लबों से निकला झूठ आँखों में पकड़ा जायेगा...!!!
पगली
यूँ सामने आप आया ना कीजिये, 
सब्र तो सब्र ही है, हर बार नहीँ होता💕.....
मिलावट का जमाना है साहिब .....! 
कभी हमारी हां में हां भी मिला दिया करो....!
तिनका-तिनका कर के, हम तेरी याद में महल बनाते रहे;
"गैर-कानूनी निर्माण" कह के नगर-निगम वाले तोड़ जाते हैं।
समझा दो तुम अपनी यादों को ज़रा;
दिन रात तंग करती हैं मुझे कर्ज़दार की तरह।
जब से उसने बारिशों में भीगना छोड़ दिया 
बादलों ने मेरे शहर पर बरसना छोड़ दिया....
मेरा प्यार राफेल डील सा था 
कभी उसको कीमत का अंदाजा ही नही हुआ 😢😢😢
हमें तो उसकी आवाज़ ने ही दीवाना बना दिया था__
खुदगर्ज़ हैं वो लोग जो चेहरा देख के प्यार करते हैं___!!
ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ, 
मुझे तुमसे मोहब्बत है, बताना भूल जाता हूँ !!
उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं,
ये दिल उसका है, अपना होता तो बात और थी...
इस कड़कती ठण्ड में भी धुप से ज्यादा सुकून उसको देखने से मिलता है
आज धुन्ध बहुत है मेरे शहर में, अपने दिखते नहीं और जो दिखते है वो अपने नहीं 
इबादत सी कर ली है... हमने तुमसे इश्क़ कर के तुम्हें याद किये बिना.. ना दिन निकलता है ना शाम ढलती है 

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

हर शमा बुझी रफ्ता रफ्ता.. हर ख्वाब लूटा धीरे धीरे.. शीशा ना सही पत्थर ही सही.. दिल टूट गया धीरे धीरे !!
कौन शरमा रहा है यूँ फुर्सत में याद कर के हिचकियाँ आना तो चाह रही हैं, पर हिच-किचा रही हैं
भटकने की आरजू किसको है जो तुम मिल जाओ तो ठहर जाऊँ मैं ...

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

हक़ से दे तो
तेरी "नफरत" भी सर आँखों पर...
खैरात में तो
तेरी "मोहब्बत" भी मंजूर नहीं..."
मैं उसे खोने से डरता था,
वो इस डर को ही मेरी कमज़ोरी समझती थी।
मैं बेहिसाब फ़िक्र करता था,
वो अपने जिक्र को उंगलियों पर गिनती थी।

कहानी तो अधूरी ही रहनी थी साहिब!

वो रात के जुगनू की चमक
दिन के उजालों में जो खोजा करती थी
काश इक दिन ऐसा भी आये हम तेरी बाहों में समा जाएँ,
सिर्फ हम हो और तुम हो और वक्त ही ठहर जाए।
दंगाई हैं तेरी यादें ...फूंक देती हैं दिल को..
बताओ कोई कानून कि ये मामला भी सुलझे..
हवस के इस दौर में तुझसे मोहब्बत ऐसी करनी है
की तुझे पहली बार हाथ लगाऊँ तो तेरी माँग भरने के लिए....... 
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी हैं 
कभी कबिरा दिवाना था , कभी मीरा दिवानी हैं 
यहाँ सभी लोग कहते हैं कि मेरी आँखों में आँसू हैं 
जो तू समझें तो मोती हैं , जो ना समझें तो पानी हैं 

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

ये मोहब्बत का दस्तूर भी बड़ा अजीब लगता है..!!

उदास जब भी हो यार तो कसूर अपना लगता है..!!
ख्वाहिश है तुम हमारे बनो चाहत है सातों जनम तक।

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

तू बिल्कुल चांद की तरह है।।

नूर भी है,गरूर भी है,दूर भी है !

शनिवार, 21 दिसंबर 2019

मेरे *कत्ल* की कोशिश तो उनकी *निगाहो* ने की थी... पर अदालत ने उन्हें *हथियार* मानने से *इन्कार* कर दिया।
तू जरा सी कम खूबसूरत होती तो भी बहुत खूबसूरत होती...
जिसके लिए तोड़ गए हो हमसे रिश्ता उनसे कहना हमारी जिंदगी का ख्याल रखे
जिंदगी और तुम.... दोनों समझ से बाहर हो...
मरहम ना सही नया झख़्म ही दे दो महसूस तो हो, की तुम भूले नहीं हो!!
क़ैद है जो मेरी रूहानियत में .. वही अनकहे अल्फाज़ हो तुम :)
मोहब्बत करने लिए जिस्म नही सिर्फ एहसास और जज़्बात ही काफी है ।।
दिल क्या - जिस्म क्या तुम रूह हो मेरी, तलब क्या - सुकून क्या तुम साँस हो मेरी.....!!!!
रिश्ता तो तुझसे रूह से जोड़ा था जिस्म से तो बस छुआ था ।।
मुहब्बत तो तुमसे पहली नज़र में हो गई थी अब तो आँखे बस दीदार करती हैं।।
हमारी उनसे ऐसी भी होती हैं बाते ना वो बोलते हैं ना हम।। 
अपने लफ्जों में तेरी झलक देखना शायद मेरी आदत हैं______
उन लफ्जों में तेरा जिक्र होना शायद यहीं इबादत हैं_______
गुम हो जातीं हैं खामोशियों में बातें, अपनो की कुछ बातें दिल पे लग जाने से..!
तुम मेरी ज़िन्दगी की वो खुशी हो जिसे मैंने अपनी हर दुआ में मांगा है
सभी को...........चाहने वाले मिले, एक हमीं को भाव खाने वाले मिले,....
दर्द ज्यादा है , पर तुमसे अच्छा है ... कम से कम साथ तो है

मैं इश्क़ लिखूँगा तुम अपना नाम पढ़ लेना 
बिन कहे मुझे समझ पाए तो कोई बात बने 
ये कैसा तेरा मोह है तुझे देखूँ तो नज़रें हटती नहीं हैं...
मैं पागल हू, और मेरा पागलपन तुम हो...
अब डर घाव से नही, लोगों के लगाव से लगता है
जाने मुझे क्या हो गया हैं, तुझ बिन कुछ सूझता कयूं नहीं है ।

शनिवार, 14 दिसंबर 2019

याद रखना जब कोई हमारे आँखों में धूल झोकता है,

तो हमें पहले से भी बेहतर दिखने लगता है..

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

बताओ न ! हम लगते थे कैसे?

तुम्हें तो याद है ना हँसना हमारा___
वो जो देख कर अनदेखा सा करती है हमें... 
देखेगी आँखें फाड़ के जब हम नज़र नहीं आयेंगे..
दर्द जो बेहिसाब दिया है आपने
काश प्यार भी ऐसा ही किया होता
अजीब अँधेरा है यारा तेरी.. महफ़िल में... किसी का दिल जला फिर भी तुझे....रोशनी नही नज़र आयी....!!
मेरे अपने बनकर मुझे धोका देते गए और हम पागलपन में उनको मौका देते गए...
बदल जाता है पल में मिज़ाज वो ग़ैरों संग मिल ग़ैर हो जाते हैं 
भरोसा तोड़ कर क्या मिला तुमको एक मासूम से दिल का सवाल है तुमसे..
खंजर लगा तो वो हाल हुआ बे हिसाब भरोसा तार तार हुआ
इजाजत हो तो हम भी वहम एक पाल ले... तुम भी याद करते हो हमे इसे हकीकत मान ले !!
हम कुछ इस तरह से उनकी मोहब्बत में खोए थे... कि उनके हाथों में खंजर था ये हम चाह के भी देख ना सके...
इजाजत हो तो हम भी वहम एक पाल ले... तुम भी याद करते हो हमे इसे हकीकत मान ले !!
कुछ ख़ास नहीं जिंदगी में जीने के लिए... कुछ सुखद गलतियों के सहारे जिए जा रहा हूँ
अजीब है तेरा महफ़िल से यू चले जाना ना दुआ सलाम और नज़रों से नज़रें चुराना
तुम्हारी बात लम्बी है दलीलें है बहाने हैं..! 
हमारी बात इतनी है हमारी जिंदगी हो तुम..!!
मुस्कुराकर मैफिल में दिल ही दिल में रोते हैं इसीलिए तो इस जिन्दगी को जोकर कहते हैं..!!
बस तुम ही तुम बिखरे हो...
मेरी रूह से मेरी सांस तक...
जब थक जाओ दुनियाँ की महफिलों से तुम, आवाज देना हम अक्सर अकेले ही रहते हैं।
तेरी यादो की कोई सरहद होती तो अच्छा होता खबर तो होती कि कितना सफर तय करना है।
मेरे अल्फ़ाज़ झगड पड़े है, तेरे इश्क़ के तारीफ के खातिर कोई कह रहा है तुम्हे चांद लिखूं कोई कह रहा है कायनात...
कदम मेरे भी लड़खड़ा गये सिंदूर देखकर... 
शीशा कार का उसने भी चढ़ा लिया मुझे देखकर.!!
दर्द में भी ये लब मुस्करा जाते हैं... बीते लम्हें जब भी याद आते हैं...
जलाने होंगे मुहब्बत के बेशुमार चिराग़, ~ अभी अंधेरा बहुत है कई मकानों में

मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

रविवार, 8 दिसंबर 2019

छोड़ दिया उसने मुझे गरीब कहकर...

 उसको पता ही नहीं प्याज़ का खेत है मेरा!

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

बात इतनी सी थी की आप अच्छे लगते थे, अब बात इतनी बढ़ गई है, की आप के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता
मैं प्यार (پیار) लिखता रहा ..,
वो प्याज़ (پیاز) पढ़ती रही.. !!

एक 'नुक़्ते' ने  मोहब्बत का
'सलाद' बना दिया ... !!!

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

दूर रहना मंजूर नही,

और साथ रहना तक़दीर में नही।
दरिया से भी लौट जाते है मुसाफिर प्यासे साहेब हर पानी की फितरत प्यास बुझाना नही होती
अंदाज़े से न नापिये किसी इंसान की हस्ती को... ठहरे हुए दरिया अक्सर गहरे हुआ करते हैं..! 
तेरी कश्ती तेरा दरिया तेरा ही मझधार सही तुझसे जीते तो क्या जीते तुझसे जंग तो हार सही
पसंद ना आए हमारा साथ तो बता देना नादान लोगों , महसूस भी ना कर पाओगे इतने दूर चले जाएंगे!!
तुम्हे लगा होगा कि... कभी ना कभी तो तुम्हे भुला देंगे, अब तुम्हे लिखेंगे... इतना की ज़माने को रुला देंगे।

तुम जो कहते हो ना, ख़ुश रहा करो. तो फिर सुन लो, हमेशा मेरे पास रहा करो.
प्यार तो जुए के खेल की तरह है साहब जिनके जज़्बात सच्चे हो उनकी हार पक्की है
कोई तो समझो वेदना हँसते हुए चेहरों की जमाने का गम छुपा कर भी खुशी बाँटते हैं जो
दौर वो आया है कि कातिल की सजा कोई नहीं........ हर सजा सिर्फ उनके लिए है जिनकी खता कोई नहीं......
मसला सारा इस सुकून का है जो तुम्हे सिर्फ देख लेने भर से मिल जाता है  
एक शाम आती हैं तेरी याद लेकर, एक शाम जाती हैं तेरी याद लेकर, हमें तो उस शाम का इन्तजार है जो आयें तुम्हे साथ लेकर…
हर रोज चुपके से निकल आते हैं नये पत्ते ..... यादों के दरख्तों में मैंने कभी पतझड़ नहीं देखा .......
छोटी सी जिंदगी के अरमान बहुत है... हमदर्द ना है कोई इंसान बहुत है...!!!
आँखों में अफ़सोस था, वो महज़ नमी नहीं थी, जब थक कर उचाईयों पर देखा, पास ज़मीं नही थी!
कभी चुभ जाऊँ... तो माफ करना...
लफ्ज़ मेरे... गुलाब के पौधे जैसे हैं...
पनाह मिल जाए रूह को जिसका हाथ छू कर उसी हथेली पे "घर" बनालो

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

राख से मुझे कोई आस नहीं पर तुझ से हैं....
एक ही उम्मीद थी उनसे मिलन की ख्वाब देखा था होने उनके करीब का पर पल भर में टूट गया सपना आईने की तरह  क्या कर सकते हैं खराब नसीब का
मेरी हद है वादियों तक और है जुस्तजू चाँद छूने की,
तू संग है जबतक, बेसुमार चाहत है जिंदगी यूँ ही जीने की..! 
एहमियत ना समझ पाए हमारी
ख़ैर अफ़सोस बेशुमार करोगे ......
गुज़रते है तो गुज़र जाने दो ख़्वाबों को... ख्वाब तो ख्वाब थे न तेरे हुए न मेरे हुए...
खामोशी का अपना मज़ा है ......... 
पेड़ की जड़ें फड़फड़ाया नही करती ....!
मुझे क्या,,,,तुम्हें क्या,,,,हमें क्या औऱ बस रिश्ते धीरे-धीरे खत्म ।।
ज्ञान से शब्द समझ में आते हैं और अनुभव से अर्थ...
वो छोड़ के चली गयी मुझे मैं अकेला हो गया, और जिंदगी चलती रही मैं कही खो गया...
गैरों से पूछती है तरीका निज़ात का.. 
अपनो की साज़िशों से परेशान ज़िन्दगी।

बुधवार, 4 दिसंबर 2019

समझदार आदमी अपनी समझदारी कि वजह से चुप हो जाता है और मूर्ख को लगता है कि मेरे डर की वजह से चुप है।😄
ऐतबार है दरिया को अपनी नदियों की मोहब्बत पे 
बादल तक फट जाते हैं गुरूर​  ए कसक पे...!!!
कब जाएगी तेरी लापरवाही की आदत.. 
पगली कुछ तो सम्भाल कर रखती, मुझे भी खो दिया।
जरा मेरी आँखों में तो देखो कितनी हसीन लगते हो तुम 
हर बार आईना नहीं देखा करते...
मेरी उदासियाँ तुझे कैसे नजर आयेंगी 
तुझे देख कर तो में मुस्कुराने लगता हूँ ! 
आँखों में सुकून की चाह लिए उसकी आँखों में झाँका था, दिल का दर्द और बढ़ जाएगा पता न था...!!
हर बार तो आँखों में पानी नहीं आयेगा कुछ जख़्मों से दिल भी रोया करता है! 
इस नाजुक दिल को तुमसे इतनी मोहब्बत है...!!! की जब तक आँख भीग ना जाए तब तक नींद नहीं आती...!!!

कुछ यूं उदास हूं जिंदगी से की हर किसी से हंसकर बात करता हूं...!!!
तुम्हें लगता होगा कितना बुरा हूं मैं .... लगने की बात है मुझे खुदा लगे थे तुम
अब किसी से कोई बैर नहीं मुझे.. मैंने दुःख को ही सुख मान लिया है...!!!
कहो इसे तिश्नगी या मेरी नज़रों का कसूर.... तुम्हें देखने से दिल कभी भरता ही नहीं !!
तुम कभी लौट आना चाहो तो, मेरे टूटकर बिखर जाने से पहले लौट आना !!
" सुलगती रेत पर पानी की .... अब तलाश नहीं , मगर ये कब कहा हमने कि .... हमें प्यास नहीं " !!
क्या कहा था तुमने बहुत है तुम्हारे पीछे ! होंगे , मगर एक बात कहूं ! मै अपने चाहने वालों को अपने पीछे नहीं अपने साथ लेकर चलता हूं !
तुझे खबर है कि ? तुझे सोचने के खातिर , हम बहुत से काम कल पर छोड़ देते हैं
मोहब्बत,इंतजार,बेबसी, तङप... इतने कपङो मेँ भला ठंड लगती है क्या..

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

आस लगाए तरसे नैनो का भीगना जरूरी था। तेरा प्यार तो था तेरा रूठना जरूरी था।।
इश्क़ बेजुबान है मेरा आंखे बस कह जाती हैं..!!
खंजर की क्या मजाल कि एक ज़ख्म कर सके, हर बार अपनो का ही वार था कि बार-बार घायल हुए हैं हम..
तुम ज़िंदगी की वो कमी हो जो ज़िंदगी भर रहेगी...!!
तेरा होना बहुत अज़ीज़ है मेरे लिए, सूनो बहुत अपने से लगते हो !!
लफ्ज़ , अल्फाज, कागज, कलम सब बेईमानी है तुम कहते रहो हम सुनते रहें, बस इतनी सी कहानी है
आखिर लग ही गई ना तुम्हें मोहब्बत की ठण्ड कितना समझाया था की ओढ़ लो तमन्ना मेरी
वक़्त भी लेता है करवटे कैसी कैसी, इतनी तो उम्र भी नहीं थी, जितने हमने सबक सीख लिए !!
मुझे भी समझा दे अपनी मज़बुरीयां इस कदर, की भुल जाऊ मै भी तुझे उन मज़बुरीयो के खातिर !!
तेरे जाने के बाद समझा हूँ,
कि जाने वाले को रोकते क्यों हैं..!
तु क्या गयी मेरी हर खुशी गयी नग्मे भी गये मेरी हंसी भी गयी ये सारी चीजें मेरी तुझसे ही तो थी.....
बेसब्री से तेरे आने का इंतजार करना इश्क़ ही तो है....
तुम्हें सोचते सोचते चाय, आज भी ठंडी हो जाती हैं !!!
तन्हाई, मैं औऱ तस्वीर तेरी.. यही ज़िन्दगी हैं, आज़कल.!!
मसले तो जज्बातों के थे ,तू न समझे तो भी ,खैरियत रहे ..
बाते तो बहूत सारी करनी थी तूमसे, पर तूमहारी बातें सुनकर अहसास हूआ, की चूप रहना ही ठीक है
पता नहीं मेरी खामोशी कभी तुम्हें समझ आएगी भी या नही क्यूँकी अल्फाज मेरे पास अब बचे नहीं।। 
डरते हैं कैसे गुज़रेगी, आखिर उम्र है.. कोई रात तो नहीं..
इश्क़ बेज़ुबान है मेरा, इसे तेरी चालाकियां समझ नहीँ आती.....!!
तेरे ही ख्याल पे खत्म होगा यह साल, तेरी ही ख्वाहिश से शुरू होगा नया साल
मेरी ज़िंदगी में खास है तेरी जगह ये मत सोचना कि तुझे दिल से निकाल दिया..
लोग आँसुओं में भी तेरा नाम पढ़ लेते थे इसलिए हमने रोना ही छोड़ दिया...
लिख दूं….तो लफ्ज़ तुम हो सोच लूं….तो ख़याल तुम हो मांग लूं….तो मन्नत तुम हो चाह लूं….तो मुहब्बत भी तुम हो..
तुमसे बिछड़ कर फर्क़ सिर्फ इतना हुआ, तेरी चाहत में, मैं तन्हा रहा....
दु:ख की शाम हो या, सुख का सवेरा हो,, मुझे सब मंजूर हैं, अगर साथ तू मेरे हैं,, 
गले लगाकर तेरे गम को हम आज भी खुश हैं तेरी मजबूरी रही होगी हमसे दूर जाने की.....
जिसने मेरी हंसी में भी शिकन तलाश की बारीकियाँ तो देखिए उसकी निगाह की...
शायद , कोई ख़्वाईश रोती रहती है... मेरे अंदर भी बारिश होते रहती है ...........!

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

लोगो ने समझाया की वक्त बदलता है
           और
वक्त ने समझाया की लोग  भी बदलते है...! 🤔
ये सर्द हवाएँ,बिखरे पत्ते और तन्हाई,
ऐ दिसम्बर तू सब कुछ ले आया है सिवाय उसके...!
कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थे !

कुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था !!
दुश्मन इतनी आसानी से नहीं बनते बहुत लोगों का भला करना पड़ता है.!!
जिन बाहों में सुकूं हो इस ज़िंदगी का.....!!
उन बाहों का मिलना नसीब की बात है......!! 
दिल में एक शोर हो रहा है बिन आपके दिल बोर हो रहा है....!!
अब तो वक्त ही नहीं रहा ज्यादा,, कहीं ऐसा तो नहीं हमारा रिश्ता कमजोर हो रहा है..........!!
चेहरे पर सुकून तो बस दिखाने भर का है, वरना, बेचैन तो हर शख़्स ज़माने भर का है!!
हमे क्या जरूरत खुशबू लगाने की तेरी मोहब्बत में महक कर गुलाब हुए है
मुहब्बत के बाजार में है चाहत का सौदा... वफ़ा की कीमत देकर होता है बेवफाई का सौदा....।
वफ़ा करने वालों की कमी नहीं इस दुनिया में... पता नहीं क्यु.. जो बेवफ़ा होते हैं प्यार भी उन्हीं से हो जाता है....!
कोई नहीं है तेरे सिवा.. तू ही तू है मेरी जिन्दगी में.. आज भी है वो जलता हुआ दिया तेरे प्यार का.... अब तू कर वफ़ा या कर कोई सितम... है कुबूल तेरी हर नवाजिशे.
सोचे थे आज थोड़ी सी लापरवाही हम करके दिखाएंगे... कमबख्त याद ही ना रहा की आज तुम्हे भुलाना भी था..
अगर हमारा तुम्हे छूना और चाहना एक गुनाह हैं.. तो हमे भी तुमसे रंगेहाथों गिरफ्त होना मंजूर हैं..
जान हर एक दिन तो तुमसे ही जुड़ा रहता हैं..
कभी तुम्हारे साथ रह कर तो कभी तुम्हारी उन यादों से लड़ कर..
तमन्नाओं की महफ़िल तो हमनें भी सजाई थी तुम्हारे लिए अफ़सोस !तुम तक़दीर न बन पाए फ़क़त तस्वीर बने रह गए..!!
दुनिया की नज़रों से बचा कर दिल की गहराइयों में महफूज़ रखा है तुझे.. 
और तेरी यादों में महफूज़ रखी हैं तन्हाईयाँ मेरी..!!
उसी से तो करते हैं सबकी शिकायत..! है उसकी शिकायत तो किस से कहें फिर..!!
वो क्यूँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी
हज़ार शिक़वे कई दिनों की बेरुखी, बस उनकी एक हसीं और सब रफा-दफा!
कैसे कहें ये मुस्कुराहट शायरी की कहानी है, जिंदगी बिता दे तेरी पल्को की छाँव में हर शाम तेरे चेहरे में तन्हा की ज़ुबानी हैं!
मुकम्मल इश्क की तलबगार नहीं हैं आँखे थोड़ा थोड़ा ही सही, रोज तेरे दीदार की चाहत है 
तुझे हक़ है अपनी दुनिया
में खुश रहने का..
मेरा क्या..
मेरी तो दुनिया ही तू है..
नादानियां झलकती है अभी भी मेरी आदतो से... मैं खुद हैरान हूँ मुझे इश्क़ हुआ कैसे ...
इश्क़ का सबसे बड़ा इम्तहान इश्क़ से बाहर निकलना।।
अच्छा सुनो, सोच रहा हु तुम्हारा नाम बोरो प्लस रख दु, तुम्हारे बिना मेरी ज़िंदगी रूखी रूखी सी लगती है..

मैं अब अकेले कहाँ होता हूँ,, मेरे साथ, तेरी बेहिसाब यादें रहती हैं !!!
काश के आपसे मेरी मुलाकात हो जाये इस वीरान दिल मे बहार गुलिस्तान खिल जाए
आ थक के मेरे पास कभी बैठ तो........हमदम, तू खुद को मुसाफिर और मुझे दीवार समझ ले
जरूरतें तो हम खुद पूरी कर लेंगे.. आप हमारी जिद पूरी किजीएगा 
मिले हैं इश्क़ में बस ग़म हमें ज़माने से .. ये तय है सुन ले जहां तू वहां नहीं हूं मैं..!

इश्क़ ज़रा करता हूँ तुमसे, ज़रा तुम्हारी बातों को मानता हूं .. 
ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ.......

रविवार, 1 दिसंबर 2019

कुछ पन्ने,कुछ कागज़ और पेन गिरा पड़ा है, ये देखो तुम्हारे इश्क़ में क्या-2 हुआ पड़ा है।
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना...
हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.. कुछ ऐसी भी होती हैं अधूरी मुहब्बतें...!!!
कुछ नहीं मैं तो बहुत कुछ होता है!!?
करवटें बदलता है कोई कोई गहरी नींद सोता है!!
पता है मोहब्बत करने वालों के लिए दुनियां की आबादी कितनी है..! सिर्फ एक शख्स..!!
मेरा क्या रिश्ता नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी से, सभी महीने ज़ालिम हैं इश्क़ के फकीरों पर..
जब कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं... तब दिल के अरमान आंसू बन बह जाते हैं । जो कहते थे सफ़र इक दूजे संग तय करेंगे । फिर क्यों वो हमसफर ही राह में तन्हा छोड़ जाते हैं?
सोचा था जब भी तुमसे मिलेंगे दिल खोलके बातें करेंगे लेकिन जब मुलाकात का दिन आया मेरे अल्फाज़ ही गुम गये
"बिना लगाव के प्रेम करना सीखें क्योंकि हमारा लगाव ही हमें तकलीफ देता है, प्रेम नहीं।” 
तलब हो कहूं या आदत, तू ना मिले तो बेचैन सा होने लगता हूं..!!
आँखो से आँखें मिलाके तो देखो इश्क़ की गली मे जाके तो देखो होती क्या है दिल्लगी पता चल जाएगी किसी को अपना बनाके तो देखो आसान नही है इश्क़ की राह पे चलना काँटों भरी राह पे पैर चलाके तोदेखो मिल जाएगी एक अलग ही दुनिया इश्क़ के समुंदर में गोते खाके तो देखो
झूम लूँ  तेरी ही बाँहों में एक ख़ुशी बनकर, ~ जो….मिल जाए तू मुझे एक ज़िंदगी बनकर..
प्यार निभाना आना चाहिए सहाब, हो तो सबको जाता है।
तुझे मेरा होना है कि नही यह तो किस्मत पर है 
पर तुझे अपना मान कर बहुत सुकून मिलता है।
उम्र कम थी और "इश्क" बेहिसाब हो गया~~ उम्र बढ़ती गई और ये"रोग" लाइलाज हो गया
डाल कर आदत बेपनाह याराना की अब कहते है कि समझा करो वक़्त नही है!
लबों की ख़ामोशियाँ मिट जाएँगी साथ मेरे शायद तुम समझ पाओ ये मेरी सिसकियाँ 
धीरे धीरे दामन वफ़ाओ का शायद काँटो की सेज लगने लगेगा , फिर चले आएँगे , तुम पुकार लेना
💕
तुम्हारे ख्याल, डायरी, शायरियाँ....
इश्क बिखरा पड़ा है कमरे में....
मीठा सा होता है...सफ़र यह ज़िंदगी का... बस कड़वाहट तो...किसी से ज़्यादा उम्मीदें रखने से होती हैं...
ये सर्द मौसम, ये ठंडी हवाँये और तेरी महक, लगता हैं दिसंबर आ रहा हैं तुमको साथ लेकर !!!
थोड़ा सही, पर जिम्मेदार हूँ मैं जिम्मेदारी से बचा नहीं करता !! दूध का शौक़ीन हूँ, बहुत जिद्दी हूँ थोड़ा बुरा हूँ पर नशा नहीं करता !!
सुनो, तुम भी बस ऐसे लौट आओ, जैसे लौटता सावन पतझड़ के बाद !!
सुनो, तुम भी बस ऐसे लौट आओ, जैसे लौटता दिसम्बर नवंबर के बाद !!
कि आठो पहर मुझ को फुर्सत नही , कहीं खो गया मेरा इतवार अब .....
तुम लौट तो आओगे ,सिर्फ़ राख से खोजने इश्क़ दोबारा

शनिवार, 30 नवंबर 2019

तू कहती नहीं मैं बताता नहीं, ये प्यार है या पहेली, कुछ समझ आता नहीं...
ज़िन्दगी में कुछ लोग हमारे लिये बहुत खास होते है, लेकिन हम उनको बताते नहीं...
दीवारों से कभी खुद से... बातें करोगे तुम 
हमसे बिछड़ के रात दिन, रोया करोगे तुम
खुदा करे कभी,शिकन तक ना आए तेरे माथे पर.. मेरी आँखे तुझे,हर दौर में हँसता देखें....
ऐतबार की सीढ़ी से कुछ ऐसा गिराया उसने.....!! 
 अब तमन्ना भी करें चढ़ने की तो भी पाँव लड़खड़ा जाते हैं......!!
एक दिन हम और आप महज एक याद बनकर रह जाएंगे...!! 
कोशिश कीजियेगा कि यादें अच्छी बनी रहें...
मेरी हर नज़र में बसे हो तुम.... मेरी हर कलम पर लिखे हो तुम...!!! तुम्हें सोच लुं तो शायरी मेरी ना लिख सकुं तो वो ख्याल हो तुम.
खुदा से रोज़ तुम्हे मांगता हूँ.... 
 मेरी चाहत इबादत हो गई....
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
सुनो आजमा रही हो किसको अपने आप को या हमको बता जरूर देना कौन खरा उतरा है तेरी कसौटी पे !!
मेरी शराफ़त देखो आज तक किसी से नहीं कहा प्यार के लिये, ना उनको आने पे ना छोड़ जाने पे
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद अब कोई अच्छा भी लगता है तो हम इजहार नहीं करते !
जीवन के अनमोल पल का विश्लेषण करते हुए एक ख्याल आया , जिससे हमें पहला इश्क़ होता है वो हमारा क्यूँ नही हो पाता ? और हम इतने लाचार हो जाते हैं कि उसे जाने भी दे देते है बड़े आसानी से , बिना किसी रोक टोक के और यूँ ही सब कुछ होने देते हैं और ईश्वर से उम्मीद लगाए रहते है वो लौट जाए :(
ज़िन्दगी में कुछ लोग हमारे लिये बहुत खास होते है, लेकिन हम उनको बताते नहीं...
खुदा करे कभी,शिकन तक ना आए तेरे माथे पर.. मेरी आँखे तुझे,हर दौर में हँसता देखें....

?

इतने भी कीमती न थे तुम, जितनी तुम्हारी कीमत चुकाई मैंने
इतना "दिल"से ना लगाया करो मेरी बातो को ... 
 कोई "बात" दिल में रह गई तो "हमे" भुला नहीं पाओगे
मुकम्मल ना सही इसे अधूरा ही रहने दो, इश्क है कोई मकसद तो नहीं...
संभल कर किया करो गैरों से हमारी बुराई
तुम जाकर जिनको जताते हो वो आकर हमें बताते है
हर पल तेरी राह भटकती हैं... बिगड़ैल हो गई यादें मेरी भी.!!
आ लिख दूँ पत्तों पे हम दोनों का नाम कोई पूछेगा तो कह देंगे,हवाओं ने साजिश की होगी
क्या अजीब सी ज़िद है हम दोनों की, तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की
तेरी बेरूखी ने छिन ली मुझसे शरारते मेरी और लोग समझते है बहुत समझ गया हूँ मै....
" उसने कहा " हद ' हाेती है, हद' में न रहने की ""!
" हमने कहा, " जब ' बेहद ' लगे प्यारा काेई, तो कैसे 'हद ' में रहे काेई,,
लोग कहते है कि वक्त हर ज़ख्म को भर देता है... पर किताबों पर धूल जमने से कहानी बदल नहीं जाती
लिखते रहेंगे कागजों में कैसे गुजर रही है जिंदगी पढ़ेंगे लोग तो मुस्कुरायेंगे या पाएंगे आंखों में नमी
मैं जिसे सोचकर लिखता रहता हूं.. क्या तुम भी पढ़कर मुझे सोचते हो.!!
कुछ लोग नही समझते मेरे जज्बातों को उन्हें अपने एहसासों का एहसास कैसे कराऊँ....
धुँधली हो गयी यादें फिर से एक झोंका हवा का बनकर आ जाओ 
एक नज़र देख कर उसने , सौ नुक्स निकाले मुझमें। फिर भी मैं ख़ुश हूँ कि मुझे गौर से देखा उसने।।
दिल से ज्यादा महफूज जगह और कहीं नही मगर,,, सबसे ज्यादा लोग लापता यही से होते है ...
अब ना करूँगा अपने दर्द को बया किसी के सामने, दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यूँ करना
नही मिला कोई आज तक तूम सा मूझे कोई.....पर बात ये सितम अलग है की मिले तूम भी नही....!!

शनिवार, 23 नवंबर 2019

मेरा लिखना और तेरा पढ़ना उफ्फ्फ...
😍
कितना पढ़ा- लिखा इश्क़ है अपना...
😂
कल तक जो मेरे लफ्जों में हूआ करते थे, आज वोह मेरी खामोशी में है.

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

तुम्हारा इंतज़ार रहता है .. ये जानते हुए कि तुम जा चुके हो

साथ चलते किसी के सपनों को अपना बना लिया, फिर वो अपना ही अपना ना रहे तो उन सपनों का क्या करे?

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019

उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं,
ये दिल उसका है, अपना होता तो बात और थी...

बडी खामोशी से भेजा था गुलाब उनको,

पर खुशबू ने सारे शहर मे हंगामा कर दिया।

शनिवार, 2 मार्च 2019

हमें क्या पता था, मौसम ऐसे रो पड़ेगा;
हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई थी।

सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

प्रेम तो सिर्फ सुकून ही देता है..... घुटन ... उससे जुड़ी अपेक्षाएं देती है..