सौ तरह से
याद आते हो तुम,,
और मुझे करवटें
दो ही आती हैं...
ज़हर की जरूरत नहीं...इश्क है
नज़रअंदाजी से ही मर जाएंगे !!
उसे बोलो ना-वो बेपरवाह ही रहे...
हम बिना दस्तक के आये थे ,
बिना आहट के चले जाएंगे....
तुम ना समझे हमकाे,, ना ही समझने की कोशिस की,,
हमने चाहा ही क्या था तुमसे... तुम्हारे सिवा..
तुम ना समझे हमकाे,, ना ही समझने की कोशिस की,,
हमने चाहा ही क्या था तुमसे... तुम्हारे सिवा..
तु दर्द दे,,,,,,,,,दर्द की,,,,,,,,,दवा दे तु
इश़्क के शोलों को,,,,,, लम्हों की,,,,,हवा दे तु
बन के काफ़िर,,,,,,, तेरे दर पे आए हैं,,,,,
"मुहब्बत मे डूब मरो",,,,,,,,ऐसी,,,,,बद्दुआ दे तु।
न पूछ दास्ताने मोहब्बत
बड़ी लंबी कहानी है ___
मैं ज़माने से नहीं हारा
बस --------
किसी की बात मानी है --
फुरसत में पढ़ना कभी हमारी शायरी को..
यकीन मानिये ..
आपको यकीन हो जायेगा,..
"की, लफ्ज़ों में भी दर्द होता है"
*चाहने......की हद कब से होने लगी...*
*अरे हद...से गुज़ारना ही तो मोहब्बत है...!!*
सँवरती है
वो आईना देखकर
सँवर जाये तो
आईना देखता है ******
क्यूं चलाती हो तीर नैनों की कमान से ,
दिल तो घायल है तेरे चेहरे की मुस्कान से।।
इस से बढकर..
तुमको और कितना करीब लाँऊ मैं
कि तुमको ..
मन में रखकर भी मेरा मन नहीं लगता
उसको बहुत पसंद है मेरी आँखे
और मेरी आँखो को उसका दीदार करना
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था...
आज फिर बैठे है इक हिचकी के इंतजार में,
पता तो चले कि पंडिताईन कब हमें याद करती है..
हर तरफ हैं चर्चे मेरे यार के
मशहूर मेरे नाम से हुआ है वो
जितना पढ़ा किताबों मे
इतना आसान नही था इश्क़
मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020
मुट्ठी मे छुपा कर किसी जूगनू की तरह,
हम तेरे नाम को चुपके से पढा करते है...
जब मोहब्बत बेहिसाब हो तो
जख्मों का हिसाब क्या करना,
अक्ल कहती है मारा जायेगा
दिल कहता है देखा जायेगा
तेरा खुमार इस कदर चड़ गया है
घर आंगन में जैसे तेरा नाम गूंज गया है
सुकूं मिलता है तेरा मेरे पास होने से
तेरे न होने पर में अक्सर घबरा जाया करताा हूं
किस से करूँ शिकायत तेरी ,
यहाँ खुदा भी सिर्फ तेरी ही सुनता है ...!
इक दिन, क्यू ना...
एक घूंट चाय, तिरी झूठी प्याली से पी के देखू
इक दिन, क्यू ना...
आशिकों की बेबसी पे, मैं भी तो हँस के देखू
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
बेशक ख़त्म हो गया है सब कुछ दरमिया हमारे..
मगर फिर भी तुम मुझे याद आते बहुत हो 🌹
रिश्तों की ये नाज़ुक डोरी तोड़ी थोड़ी जाती है
अपनी आंखे दुखती हो तो फोड़ी थोड़ी जाती है
दुनिया की हर इश्क़ की कहानी "रब ने बना दी जोड़ी" जैसी नही होती ,
कई कहानियां "हमारी अधूरी कहानी" जैसी भी होती है ।
ये एक बात समझने, में रात हो गयी हैं,
में उस से जीत गया या मात हो गयी हैं ।
रविवार, 16 फ़रवरी 2020
तड़प रहीं हैं मेरी साँसें,
तुम्हें महसूस करने को,,,,,
रुबरू होकर दीदार की रस्म पूरी करो
तो कुछ बात बने...
बहक जाने दो मुझे, मेरे दिलबर की आगोश में...
वो ही मेरी सल्तनत है, वो ही मेरा सुकून है...
नफ़रत करना तो कभी सिखा ही नहीं साहेब...
हमने तेरा इंतजार किया है अपना समझ कर...
एक बस ख़ुदकुशी नहीं की है,
इश्क़ में क्या नहीं किया वरना...
हमने तब तक देखा जब तक वो नही देखे..
फिर जब वो देखे तो हम नहीं देखे..
अनदेखे धागों से यूँ बांध
गया कोई ... वो साथ भी नही है और हम
आजाद भी नही हैं...
बे इरादा हुई मुलाकात उनसे,
अब तमन्ना है की जिन्दगी साथ गुजरे....
न हवस तेरे जिस्म की न शौक तेरी लज़्ज़त का
बिन मतलबी सा बन्दा हूँ तेरी सादगी पे मरता हूँ
शनिवार, 15 फ़रवरी 2020
दर्द ने किसी को तड़पाया ना होता,आंखों ने किसी को रुलाया ना होता,खुशी ही खुशी होती हर किसी के पास,अगर रब ने इश्क़ बनाया ना होता
मज़ाक में कह दिया उसने ये दिल
तुम्हारा है,
हक़ समझकर हमने धड़कने गिरवीं
रख दी!
बांसुरी से सीखा आज नया सबक-ए-ज़िंदगी....
तमाम ज़ख्म है सीने में तब भी गुनगुनाती है...!
सोचते रहते हैं रातभर करवट बदल बदलकर,
वो क्यों बदल गया, मुझको इतना बदलकर।
अभी ज़रा वक़्त है, उसको मुझे आज़माने दो.
वो रो रोकर पुकारेगी मुझे, बस मेरा वक़्त तो आने दो।
चलो कुछ तो है दरमिया हमारे ...
खामोशी ही सही
एक बार उसने पूछा कि तुम्हे सबसे ज्यादा क्या पसंद है
मेने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया एक चाय
और दूसरे
तुम..
“ याद तेरी आयेगी हर रोज , मगर तुझे आवाज़ ना दूंगा . . लिखूगा हर स्टेट्स तेरे लिए , मगर तेरा नाम ना लूंगा . . !
जिस्म को पाना, इश्क़ का तकाजा नहीं
'दीव' रुह से रुह मिल जाये तो मुहब्बत है
सुकून मिलता है उनको सोचने भर से
बेवजह हुए इश्क़ ने वजह दे दी
तलब लगती है बार बार तुझसे बात करने की,
पता नहीं कब तुम मेरी आदत बन गए हो.!!!!!!!
यूं सवालों के घेरे में मुझे न उलझाया करो
सिर्फ
एक बार मेरी आंखों को पढ़ कर तो देखो
कुछ तो दिल में
अरमाँ दबाये बैठे थे वरना
यूही नही बादल बन गरज जाते तुम
फिक्र बता रही है जिंदा है मोहब्बत
फासलों से कह दो के ग़ुरूर ना करें.
मुझे तू इस क़दर अपने क़रीब लगती है,
तुझे अलग से जो सोचूँ, अजीब लगता है..
उफ्फ, धड़कनों की ये बेसब्री ...
इंतज़ार उसी का है जो बेफ़िक्र है
कोई तो ऐसी बात करो....
जिससे लगे कि तुम मेरे हो...!
मेने कहा पूरी मिर्ची हो तुम
वो होटों को चूम कर बोली
अब..!
देखा हजारों दफा आपको
फिर बेकरारी कैसी है
सम्हालते सम्भलता नहीं है दिल
कुछ आपमे बात ऐसी है l
बाँट लेते हैं सारा गम..
मैं और चाय मिलकर आधा -आधा....
वो लड़की के फेर में आज फ़कीर बना फिर रहा है,
जिसकी मां ने कभी राजा बाबू बना कर पाला था....।
कौन कम्बख्त मोबाइल की परवाह करता है?
यहाँ तो लोगों के दिल ही हैंग हो गए हैं।
कुछ दूर मेरे साथ चलो हम सारी कहानी कह देंगे
समझे ना तुम जिसे आँखों से वो बात मुँह जबानी कह देंगे....!!!
रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं
जब अपने साथ ‘’अपने’’ *खड़े हो जाते हैं*
ख्वाब हमें ज्यादा नहीं आते यारों
हम यहाँ अपनी हक़ीकत लिखते हैं...!!!
होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो… बन जाओ मीत मेरे मेरी प्रीत अमर कर दो
मुझे रात को सूरज नहीं दिखाई देता
क्या यही अंधा प्यार है ?
फ़र्क नहीं पड़ता कोई अब दिल दुखाये, बता दो उन्हें घावों पर घाव दर्द नहीं करते।
सोचा नहीं इश्क़ कितना और इतना होगा कभी, कुछ इत्तेफ़ाक़ भी सच में ख़ूबसूरत बेहद हुआ करते हैं।
कोई चुनावी वादा नहीं पर दिल ने तुमको चुन लिया, क्या नुक्सान हुआ सरकार का तुम क्या जानो?
शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020
वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही, इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही, खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए, ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं!
कुछ खास नही बस इतनी सी है मोहब्बत मेरी .. .!! हर रात का आखरी ख्याल और हर सुबह की पहली सोच हो तुम.
काबिलियत तो कूट-कूट के भरा है आपमे,
सुना है आप उड़ते चिड़िया के पर गिन लेती हो।
उन बातों मै मज़ा कहा जो नशे मै गुजर जाए
मज़ा तो तब है जब होश हो और नशा तुम्हारी मोहोब्बत का हो जाए
दिलों से खेलना हमें भी आता है
पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए
वो खेल हमें पसंद नही।
यूं तो कितने हसीं थे महफिल में,
दिल तो दिल है ये टिक गया तुमपर।
चाहे कितनी भी भलाई का
काम कर लो...
उस भलाई की उम्र
सिर्फ अगली गलती होने
तक ही है...!!
मैं सब्र भी रहूंगा,मैं तेरा इंतज़ार भी रहूंगा
मैं वफ़ा भी करूंगा, मैं वफ़ादार भी रहूंगा
सुनो मेरा महबूब मिले
तो मेरा सलाम कहना...
कुछ तो तेरी अदाओं में असर है सनम,
तेरी राह तकते रहते है हम यहां।
यूं तो लॉर्ड शाहब है दुनिया के लिए,
इंतेज़ार में तेरे मजबूत रहते है हम वहां।
सुनो मेरा महबूब मिले
तो मेरा सलाम कहना...
मेरा महबूब इतना प्यारा है
वो सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारा है..
गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020
यही सोच कर महफिल में ख़मोश हो गया था
कि मेरे बोलने से तेरी शान कम ना हो जाये.!
नही कहता की हाथ पकड के चलो मेरा,
पर कभी दो कदम साथ तो आया करो...
खिड़की के बाहर सूरज निकला है
खिड़की के अंदर चांद बैठा है,
असमंजस में हूं
इसे दिन लिखूं या रात
ताबीज जैसे होते है कुछ लोग....
गले लगते ही सुकून मिलता है!!
तुमको मेरा ख्याल,
मेरे चले जाने के बाद आएगा !!
जब सवाल ही इश्क पर उठा था .. तो भला जवाब क्यों जुबां देती ..
क्या #फ़साना लिखूं हमारी अधूरी मोहब्बत का
हमारे इश्क़ के चर्चे तो ज़माने में रहे हैं...
हम चले जाएंगे जख्मों की तिजारत करके
मुद्दतों तेरे शहर में हमारा चर्चा रहेगा.....!!
बुधवार, 12 फ़रवरी 2020
मेरे पास से गुज़र कर मेरा हाल तक न पूछा
मैं कैसे मान जाऊँ वो दूर जाके रोए...!!
तेरे पास से गुज़रे, तो जुनूं में थे जब दूर जा के सोचा, तो ज़ार-ज़ार रोए...!!
उन्हें कौन समझाए .....
हम नहीं हैं जिस्म की तलब गार!??
काश तुम मेरी मोहब्बत की
गहराई जान पाते!??