मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

गुज़र जाते हैं , खूबसूरत लम्हें... यूं ही मुसाफिरों की तरह... 
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं...रूके रास्तों की तरह....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें